Wednesday, February 25, 2009
न मान न गुलजार
आज पूरा देश जय हो के जश्न मैं डूबा हुआ है लेकिन क्या आपको पता है कि अगर एक व्यक्ति न होता तो न रहमान का मान होता और न गुलजार इतने गुलजार होते , आखिर कौन है वह व्यक्ति। जनाब वह व्यक्ति है विकास स्वरूप। जी हाँ विकास की लिखी पुस्तक पर ही तो स्लमडॉग मिलियेनियर बनी। विकास का नाम किसी ने नहीं लिया, गुलजार सुखविंदर का नाम जरुर ले रहे हैं पर उन्होंने भी विकास का नाम नहीं लिया। खैर कोई बात नहीं हम अपनी तरफ़ से विकास को ओस्कर देते हैं और ये दुआ भी करते हैं की वे इसी प्रकार लिखते रहें ताकि इस देश का मान बढे और सदियों तक यह देश गुलजार रहे ।
Friday, February 13, 2009
शिवराज बने अच्युतानंदन
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान वेसे तो काफी चतुर माने जाते हैं
और उन्होंने कुछ अच्छे काम भी किए हैं
पर अब लगता है की राजनीती ने उनको भी जकड लिया है।
आज वे जबलपुर मैं ही थे और शहर से मात्र तीस किलोमीटर दूर का एक वीर जवान पुरुषोत्तम पोखरण मैं शहीद हो गया था जिसको अन्तिम विदाई देने हजारों लोग उसके ग्रह नगर सिहोरा , गोसलपुर के ह्रदय नगर मैं एकत्र थे। सी ऍम के जबलपुर मैं होने के कारन यंहा के नेता और अधिकारी भी वीर को अन्तिम प्रणाम करने नहीं जा सके।
ये अलग बात है की उनको सी ऍम ने नहीं रोका था पर अगर शिवराज भी वीर को सलामी देने पहुच जाते तो कम से कम ये कहने को होता की सी ऍम सच्चे देशभक्त हैं लेकिन आज उन्होंने केरल के सी ऍम अच्युतानंदन की बराबरी कर ली।
रही बात शहर के विधायकों या बाकी नेताओ की , तो ये देशभक्त न सही "स्वामिभक्त" तो हैं ।
शिवराज जी आप खुश हो सकते हो की आपको ऐसे भक्त मिले पर आज जो गलती की वो दोबारा न हो वरना शहीदों की चिताओं पर मेले भी न लगेंगे ...
और उन्होंने कुछ अच्छे काम भी किए हैं
पर अब लगता है की राजनीती ने उनको भी जकड लिया है।
आज वे जबलपुर मैं ही थे और शहर से मात्र तीस किलोमीटर दूर का एक वीर जवान पुरुषोत्तम पोखरण मैं शहीद हो गया था जिसको अन्तिम विदाई देने हजारों लोग उसके ग्रह नगर सिहोरा , गोसलपुर के ह्रदय नगर मैं एकत्र थे। सी ऍम के जबलपुर मैं होने के कारन यंहा के नेता और अधिकारी भी वीर को अन्तिम प्रणाम करने नहीं जा सके।
ये अलग बात है की उनको सी ऍम ने नहीं रोका था पर अगर शिवराज भी वीर को सलामी देने पहुच जाते तो कम से कम ये कहने को होता की सी ऍम सच्चे देशभक्त हैं लेकिन आज उन्होंने केरल के सी ऍम अच्युतानंदन की बराबरी कर ली।
रही बात शहर के विधायकों या बाकी नेताओ की , तो ये देशभक्त न सही "स्वामिभक्त" तो हैं ।
शिवराज जी आप खुश हो सकते हो की आपको ऐसे भक्त मिले पर आज जो गलती की वो दोबारा न हो वरना शहीदों की चिताओं पर मेले भी न लगेंगे ...
Monday, December 22, 2008
मान गए भई....
इंग्लेंड के ख़िलाफ़ मेट्च मैं सचिन ने शतक मारा पूरा देश खुश हुआ
तब लोग और खुश हुऐ जब सचिन ने शतक शहीदों के नाम कर दिया।
पर मुझे खुशी नहीं हुई। क्योंकि अगर सचिन जो की रुपियों से ऊपर उठ चुके हैं, अपनी ''मैच फी" शहीदों के नाम कर देते तो शायद यह शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होती।
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